Call Me : +91 98246 55419

State Co-Operative Banks in India

Bookmark and Share
No.
Bank Name
Website
1
The Andaman and Nicobar State Co-operative Bank Ltd.
2
The Andhra Pradesh State Co-operative Bank Ltd.
3
The Arunachal Pradesh State co-operative Apex Bank Ltd.
N/A
4
The Assam Co-operative Apex Bank Ltd.
5
The Bihar State Co-operative Bank Ltd.
6
The Chandigarh State Co-operative Bank Ltd.
N/A
7
The Delhi State Co-operative Bank Ltd.
N/A
8
The Goa State Co-operative Bank Ltd.
9
The Gujarat State Co-operative Bank Ltd.
10
The Haryana State Co-opertive Apex Bank Ltd.
11
The Himachal Pradesh State Co-operative Bank Ltd.
12
The Jammu and Kashmir State Co-operative Bank Ltd.
13
The Karnataka State Co-operative Apex Bank Ltd.
14
The Kerala State Co-operative Bank Ltd.
15
The Madhya Pradesh Rajya Sahakari Bank Maryadit
16
The Maharashtra State Co-operative Bank Ltd.
17
The Manipur State Co-operative Bank Ltd.
N/A
18
The Meghalaya Co-operative Apex Bank Ltd.
19
The Mizoram Co-operative Apex Bank Ltd.
N/A
20
The Nagaland State Co-operative Bank Ltd.
21
The Orissa State Co-operative Bank Ltd.
22
The Pondichery State Co-opertive Bank Ltd.
N/A
23
The Punjab State Co-operative Bank Ltd.
24
The Rajasthan State Co-operative Bank Ltd.
25
The Sikkim State Co-operative Bank Ltd.
N/A
26
The Tamil Nadu State Apex Co-operative Bank Ltd.
27
The Tripura State Co-operative Bank Ltd.
28
The Uttar Pradesh Co-operative Bank Ltd.
29
The West Bengal State Co-operative Bank Ltd.
30
The Chhattisgarh RajyaSahakari Bank Maryadit
31
The Uttarakhand State Co-operative  Bank Ltd.
N/A

History of Firefox OS Mobile Operating System

Bookmark and Share
Firefox OS Version
Codename
OS Name
Release Date
1.0
TEF
Gecko 18
February 21, 2013
1.0.1
Shira
Gecko 18
September 06, 2013
1.1.0
Leo
Gecko 18+
October 09, 2013
1.1.1
HD
Gecko 18+
-
1.2.0
Koi
Gecko 26
December 09, 2013
1.3.0
-
Gecko 28
March 17, 2014
1.4.0
-
Gecko 30
August 8, 2014
2.0.0
-
Gecko 32
-
2.1.0
-
Gecko 34
-
2.2.0
-
Gecko 37
-

List of Linux Desktop Environments

Bookmark and Share

In general there are two flavors of X desktop. The two most famous “heavyweight” desktop projects are GNOME and KDE; these include both a desktop environment and an application development framework. A desktop environment includes a window manager, help browser, file manager, task bar, and so on. A development framework includes any number of libraries to ease application development, perhaps most importantly a GUI toolkit. GNOME and KDE are the desktops with the most support from Linux distribution vendors.

The second flavor of X desktop includes a desktop environment only; no development framework is included. The line between this flavor of desktop and a plain old window manager is a bit blurry; many people would describe Xfce, WindowMaker, and Enlightenment as desktops in this category.

Desktops can be mixed-and-matched; for example, you can run Enlightenment together with GNOME or KDE components; you can run applications developed with the GNOME or KDE development framework under any of the X desktops. One purpose of freedesktop.org is to ensure that this mixing-and-matching remains possible, and promote more of it. Read our Mission Statement for details. The executive summary is that people or organizations developing applications do not need to worry about which desktop their users will select. Applications which work with any desktop are easy to write.

One way to think about the mission of freedesktop.org is this: to ensure that the different development frameworks aren’t user-visible.

X Desktops with a Development Framework

Plain Desktop Environments

  • AfterStep : Window manager that combines flexibility with elegant look
  • AntiRight : Lightweight scripted environment that uses the GTK+ toolkit
  • awesome : Highly configurable, next generation framework window manager
  • EDE : small desktop environment, built to be simple and fast
  • Enlightenment : The Enlightenment Window Manager
  • fluxbox : Lightweight WM with support for tabs
  • FVWM : An extremely customizable window manager and some desktop applications
  • GoFun : Lightweight Desktop Entry Specification based desktop
  • IceWM : Window manager designed to be small, fast and lightweight
  • LxDE : provide a new desktop environment which is lightweight and fast
  • Matchbox: Environment for non-desktop systems, such as handheld computers
  • MATE : MATE Desktop Environment is the fork of GNOME2
  • ROX : ROX is a free, GTK+-based, fully drag-and-drop desktop
  • UDE : attempt to create new WM with original Look’n’Feel
  • WindowMaker : Window manager intended to work with GNUstep
  • Xfce : Lightweight GTK+-based environment
  • XPde : A Windows XP-like desktop environment designed for Windows users migrating to Linux

3D Desktop Environments

  • Compiz : OpenGL-based 3D window manager to extend existing desktop environments like Gnome and KDE
  • Metisse : Metisse 3D Desktop project
  • True3D*Shell : open source 3D desktop environment

Classic Desktop Environments

  • CDE : Common Desktop Environment, the traditional proprietary environment based on Motif
  • TkDesk : TkDesk predates most of the environments on this page

Source : freedesktop.org

Father of Computer Programing

Bookmark and Share

panini

कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के जनक – Father of Computer Programing

 

पाणिनि (५०० ई पू) संस्कृत भाषा के सबसे बड़े वैयाकरण हुए हैं। इनका जन्म तत्कालीन उत्तर पश्चिम भारत के गांधार में हुआ था। इनके व्याकरण का नाम अष्टाध्यायी है जिसमें आठ अध्याय और लगभग चार सहस्र सूत्र हैं। संस्कृत भाषा को व्याकरण सम्मत रूप देने में पाणिनि का योगदान अतुलनीय माना जाता है। अष्टाध्यायी मात्र व्याकरण ग्रंथ नहीं है। इसमें प्रकारांतर से तत्कालीन भारतीय समाज का पूरा चित्र मिलता है। इनका जीवनकाल 520 – 460 ईसा पूर्व माना जाता है ।

एक शताब्दी से भी पहले प्रिसद्ध जर्मन भारतिवद मैक्स मूलर (१८२३-१९००) ने अपने साइंस आफ थाट में कहा – "मैं निर्भीकतापूर्वक कह सकता हूँ कि अंग्रेज़ी या लैटिन या ग्रीक में ऐसी संकल्पनाएँ नगण्य हैं जिन्हें संस्कृत धातुओं से व्युत्पन्न शब्दों से अभिव्यक्त न किया जा सके । इसके विपरीत मेरा विश्वास है कि 2,50,000 शब्द सम्मिलित माने जाने वाले अंग्रेज़ी शब्दकोश की सम्पूर्ण सम्पदा के स्पष्टीकरण हेतु वांछित धातुओं की संख्या, उचित सीमाओं में न्यूनीकृत पाणिनीय धातुओं से भी कम है । …. अंग्रेज़ी में ऐसा कोई वाक्य नहीं जिसके प्रत्येक शब्द का 800 धातुओं से एवं प्रत्येक विचार का पाणिनि द्वारा प्रदत्त सामग्री के सावधानीपूर्वक वेश्लेषण के बाद अविशष्ट 121 मौलिक संकल्पनाओं से सम्बन्ध निकाला न जा सके ।"

The M L B D News letter ( A monthly of indological bibliography) in April 1993, में महर्षि पाणिनि को First software man without hardwear घोषित किया है। जिसका मुख्य शीर्षक था " Sanskrit software for future hardware "जिसमे बताया गया " प्राकृतिक भाषाओं को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए अनुकूल बनाने के तीन दशक की कोशिश करने के बाद, वैज्ञानिकों को एहसास हुआ कि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में भी हम 2600 साल पहले ही पराजित हो चुके है। हालाँकि उस समय इस तथ्य किस प्रकार और कहाँ उपयोग करते थे यह तो नहीं कह सकते, परआज भी दुनिया भर में कंप्यूटर वैज्ञानिक मानते है कि आधुनिक समय में संस्कृत व्याकरण सभी कंप्यूटर की समस्याओं को हल करने में सक्षम है।

व्याकरण के इस महनीय ग्रन्थ मे पाणिनि ने विभक्ति-प्रधान संस्कृत भाषा के 4000 सूत्र बहुत ही वैज्ञानिक और तर्कसिद्ध ढंग से संगृहीत हैं।

NASA के वैज्ञानिक Mr.Rick Briggs.ने अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पाणिनी व्याकरण के बीच की शृंखला खोज की। प्राकृतिक भाषाओं को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए अनुकूल बनाना बहुत मुस्किल कार्य था जब तक कि Mr.Rick Briggs. द्वारा संस्कृत के उपयोग की खोज न गयी। उसके बाद एक प्रोजेक्ट पर कई देशों के साथ करोड़ों डॉलर खर्च किये गये।

महर्षि पाणिनि शिव जी बड़े भक्त थे और उनकी कृपा से उन्हें महेश्वर सूत्र से ज्ञात हुआ जब शिव जी संध्या तांडव के समय उनके डमरू से निकली हुई ध्वनि से उन्होंने संस्कृत में वर्तिका नियम की रचना की थी। पाणिनीय व्याकरण की महत्ता पर विद्वानों के विचार

"पाणिनीय व्याकरण मानवीय मष्तिष्क की सबसे बड़ी रचनाओं में से एक है"।
– लेनिन ग्राड के प्रोफेसर टी. शेरवात्सकी

"पाणिनीय व्याकरण की शैली अतिशय-प्रतिभापूर्ण है और इसके नियम अत्यन्त सतर्कता से बनाये गये हैं"।
– कोल ब्रुक

"संसार के व्याकरणों में पाणिनीय व्याकरण सर्वशिरोमणि है… यह मानवीय मष्तिष्क का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अविष्कार है" ।
– सर डब्ल्यू. डब्ल्यू. हण्डर

"पाणिनीय व्याकरण उस मानव-मष्तिष्क की प्रतिभा का आश्चर्यतम नमूना है जिसे किसी दूसरे देश ने आज तक सामने नहीं रखा"।
– प्रो. मोनियर विलियम्स

।। जयतु संस्‍कृतम् । जयतु भारतम् ।।

 

Excellence of Sanskrit Language

संस्कृत भाषा की विशेषताएँ

१) संस्कृत, विश्व की सबसे पुरानी पुस्तक (वेद) की भाषा है। इसलिये इसे विश्व की प्रथम भाषा मानने में कहीं किसी संशय की संभावना नहीं है ।

२) इसकी सुस्पष्ट व्याकरण और वर्णमाला की वैज्ञानिकता के कारण सर्वश्रेष्ठता भी स्वयं सिद्ध है।

३) सर्वाधिक महत्वपूर्ण साहित्य की धनी होने से इसकी महत्ता भी निर्विवाद है।

४) इसे देवभाषा माना जाता है।

५) संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं बल्कि संस्कारित भाषा भी है अतः इसका नाम संस्कृत है। केवल संस्कृत ही एकमात्र भाषा है जिसका नामकरण उसके बोलने वालों के नाम पर नहीं किया गया है। संस्कृत को संस्कारित करने वाले भी कोई साधारण भाषाविद् नहीं बल्कि महर्षि पाणिनि, महर्षि कात्यायन और योग शास्त्र के प्रणेता महर्षि पतंजलि हैं। इन तीनों महर्षियों ने बड़ी ही कुशलता से योग की क्रियाओं को भाषा में समाविष्ट किया है। यही इस भाषा का रहस्य है।

६) शब्द-रूप – विश्व की सभी भाषाओं में एक शब्द का एक या कुछ ही रूप होते हैं, जबकि संस्कृत में प्रत्येक शब्द के 25 रूप होते हैं।

७) द्विवचन – सभी भाषाओं में एक वचन और बहु वचन होते हैं जबकि संस्कृत में द्विवचन अतिरिक्त होता है।

८) सन्धि – संस्कृत भाषा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है सन्धि। संस्कृत में जब दो शब्द निकट आते हैं तो वहाँ सन्धि होने से स्वरूप और उच्चारण बदल जाता है।

९) इसे कम्प्यूटर और कृत्रिम बुद्धि के लिये सबसे उपयुक्त भाषा माना जाता है।

१०) शोध से ऐसा पाया गया है कि संस्कृत पढ़ने से स्मरण शक्ति बढ़ती है।

११) संस्कृत वाक्यों में शब्दों को किसी भी क्रम में रखा जा सकता है। इससे अर्थ का अनर्थ होने की बहुत कम या कोई भी सम्भावना नहीं होती। ऐसा इसलिये होता है क्योंकि सभी शब्द विभक्ति और वचन के अनुसार होते हैं और क्रम बदलने पर भी सही अर्थ सुरक्षित रहता है। जैसे – अहं गृहं गच्छामि या गच्छामि गृहं अहम् दोनो ही ठीक हैं।

१२) संस्कृत विश्व की सर्वाधिक 'पूर्ण' (perfect) एवं तर्कसम्मत भाषा है।

१३) देवनागरी एवं संस्कृत ही दो मात्र साधन हैं जो क्रमश: अंगुलियों एवं जीभ को लचीला बनाते हैं। इसके अध्ययन करने वाले छात्रों को गणित, विज्ञान एवं अन्य भाषाएँ ग्रहण करने में सहायता मिलती है।

१४) संस्कृत भाषा में साहित्य की रचना कम से कम छह हजार वर्षों से निरन्तर होती आ रही है। इसके कई लाख ग्रन्थों के पठन-पाठन और चिन्तन में भारतवर्ष के हजारों पुश्त तक के करोड़ों सर्वोत्तम मस्तिष्क दिन-रात लगे रहे हैं और आज भी लगे हुए हैं। पता नहीं कि संसार के किसी देश में इतने काल तक, इतनी दूरी तक व्याप्त, इतने उत्तम मस्तिष्क में विचरण करने वाली कोई भाषा है या नहीं। शायद नहीं है।

Page 1 of 1412345...10...Last »

Post Calendar

March 2015
M T W T F S S
« Jan    
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031  

Go Green Living

Inflate your tires
If your tires are inflated at all times your car will run more miles on less gas.
Add this to your site

Tag Cloud